web analytics
Sun. Sep 25th, 2022
Home remedies for Sinus in hindi

साइनस का परमानेंट इलाज & आयुर्वेदिक दवा (Home remedies for Sinus in hindi) – शायद ही कोई इंसान हो जिसने साइनस का नाम ना सुना हो लेकिन काफी सारे इंसान ऐसे भी होते है जिन्हे साइनस के बारे में जानकारी नहीं होती है| अगर आप भी साइनस के बारे में नहीं जानते है और आप साइनस के बारे में सर्च कर रहे है तो हमारा यह पेज आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है| दरसल साइनस नाक का रोग होता है, साइनस को अंग्रेजी में sinus कहते है, साइनस को आयुर्वेद में प्रतिश्याय कहा जाता है। हालाँकि सर्दी के मौसम में नाक बंद होना या जुकाम होना आम समस्या है लेकिन नाक बंद होने के साथ साथ साइनस के आने लक्षण भी दिखाई दे तो लापरवाही नहीं करनी चाहिए| साइनस की परेशानी का सही समय पर इलाज ना किया जाए तो इंसान अस्थमा और दमा जैसी गम्भीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है|

जिन इंसानो को साइनस के बारे में जानकारी नहीं होती है वो साइनस के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए इंटरनेट का सहारा लेते है| इंटरनेट पर इंसान साइनस कया है? साइनस की परेशानी कया होती है? साइनस के कारण, साइनस होने के कारण कया है? साइनस होने के कारण कौन कौन से है? साइनस होने कारण बताओ, साइनस के लक्षण कया है? साइनस का परमानेंट इलाज, साइनस का परमानेंट इलाज कया है? साइनस का इलाज, साइनस का रामबाण इलाज, साइनस का घरेलू इलाज, साइनस का घरेलू उपचार, साइनस की आयुर्वेदिक दवा, साइनस के लिए आयुर्वेदिक दवा, साइनस की रामबाण दवा, साइनस को जड़ से ख़त्म करने का घरेलू उपाय, sinus in hindi, sinus symptoms in hindi, Home remedies for Sinus, Home remedies for Sinus in hindi इत्यादि लिखकर सर्च करता है|

हालाँकि काफी इंसान साइनस की परेशानी होने पर डॉक्टर से साइनस की अंग्रेजी दवा या साइनस की एलोपेथिक दवा का सेवन कर लेते है लेकिन साइनस की परेशानी को आप साइनस के घरेलू उपाय अपनाकर भी कर सकते है| घरेलू नुस्खों को अपनाने से आपको नुक्सान होने की सम्भावना काफी कम होती है, लेकिन साइनस का परमानेंट इलाज जाने से पहले आपको साइनस के बारे में भी जानकारी होना बहुत जरुरी है, चलिए अब हम आपको साइनस के बारे में जानकारी उपलब्ध कराते है –

Table of Contents

साइनस रोग या साइनस क्या होता है? (What is Sinus in hindi ?)

अधिकतर इंसानो का मानना है की साइनस की परेशानी में इंसान के नाक के अंदर मौजूद हड्डी बढ़ जाती है या हड्डी तिरछी हो जाने की वजह से साँस लेने में परेशानी हो जाती है| साइनस की परेशानी से पीड़ित इंसान की नाक अवरूद्ध हो जाती है, साइनस की परेशानी में नाक से कफ भी बहता रहता है, अगर साइनस के इलाज में देरी की जाती है तो इसकी वजह से कई आने परेशानी या रोग भी उत्पन्न हो सकते है| साइनस की परेशानी से पीड़ित इंसान को ठण्डी हवा के संपर्क में आने से, धूल या किसी भी प्रकार का धुआँ नाक में जाने से इंसान को काफी परेशानी हो जाती है|

कुछ इंसानो का मानना है की साइनस एक प्रकार की झिल्ली होती है, जब कोई इंसान साइनस के संक्रमण का शिकार होता है तो इस संक्रमण की वजह से झिल्ली में सूजन की परेशानी हो जाती है, झिल्ली में सूजन की वजह से हवा की जगह साइनस में मवाद या बलगम इत्यादि भरने से साइनस बंद हो जाते हैं। साइनस बंद होने की वजह से सिर में दर्द, माथे में दर्द या गालों पर ऊपर के जबड़े में दर्द की समस्या हो जाती है| साइनस का परमानेंट इलाज आप घरेलू उपायों से कर सकते है, अगर आपको साइनस के घरेलू उपाय के बारे में जानकारी नहीं है तो आप हमारा लेख अंत तक जरूर पढ़ें, लेकिन उससे पहले हम आपको साइनस के प्रकार के बारे में बताते है –

साइनस के प्रकार | types of sinus in hindi

अधिकतर इंसानो को साइनस का तो पता है लेकिन अधिकांश लोगो को साइनस के प्रकार के बारे जानकारी नहीं होती है, चलिए अब हम आपको साइनस के प्रकारो के बारे में जानकारी दे रहे है –

  • तीव्र साइनस (Acute sinusitis in hindi) – जैसा की आपको नाम से ही पता चल रहा होगा की तीव्र साइनस की परेशानी एकदम से हो जाती है या इस प्रकार के साइनस में मरीज में साइनस के लक्षण एकदम से दिखाई देने लगते है और इंसान को दो से चार हफ्तों तक तकलीफ का सामना करना पड़ता है।
  • मध्यम तीव्र साइनस (Sub Acute sinusitis in hindi) – इस प्रकार के साइनस में सूजन की समस्या तीन से बारह हफ्तों तक रह सकती है, इस प्रकार की परेशानी को दूर करने के लिए आप वैध या चिकित्सक की सलाह से साइनस के घरेलू उपाय अपना सकते है|
  • जीर्ण साइनस (Chronic sinusitis in hindi) – यह साइनस का तीसरा प्रकार होता है, इस प्रकार के साइनस में पीड़ित के अंदर साइनस के लक्षण 11 हफ्तों या 11 हफ्तों से ज्यादा समय तक रह सकते है।
  • आवर्तक साइनस (Recurrent sinusitis in hindi) – यह साइनस का आखिरी प्रकार है, इस प्रकार के साइनस से पीड़ित इंसान में साइनस की समस्या बार बार होती रहती है|

ऊपर आपने साइनस के प्रकार के बारे में जाना लेकिन कया आप जानते है की आधुनिक मेडिकल साइंस या डॉक्टरों के अनुसार साइनस दो प्रकार का होता है – पहला क्रोनिक साइनोसाइटिस और दूसरा है एक्यूट साइनोसाइटिस | चलिए अब हम आपको साइंस के अनुसार साइनस या साइनुसाइटिस के प्रकार के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है –

क्रोनिक साइनोसाइटिस (chronic sinusitis in hindi )  –

क्रोनिक साइनोसाइटिस (chronic sinusitis in hindi) से पीड़ित इंसान में क्रोनिक साइनोसाइटिस के लक्षण (symptoms of chronic sinusitis in hindi) 11 हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक रह सकते है, आयुर्वेद में क्रोनिक साइनोसाइटिस को पक्व प्रतिश्याय के नाम से जाना जाता है| क्रोनिक साइनोसाइटिस के लक्षण (symptoms of chronic sinusitis in hindi) दिखाई देने पर कभी भी लकापरवाही नहीं करनी चाहिए वरना आपको घातक परिणाम भुगतने पद सकते है|

एक्यूट साइनोसाइटिस (acute sinusitis in hindi) –

आयुर्वेद में एक्यूट साइनोसाइटिस को नव प्रतिश्याय के नाम से पुकारा जाता है| किसी भी इंसान के अंदर अगर एक्यूट साइनोसाइटिस के लक्षण (symptoms of acute sinusitis in hindi) दिखाई दे रहे तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श और इलाज कराएं, एक्यूट साइनोसाइटिस के लक्षण (symptoms of acute sinusitis in hindi) दो से चार हफ्तों तक रहते है|

साइनस होने के कारण (Causes of Sinus in hindi)

आज के समय में साइनस की समस्या से पीड़ित इंसानो की संख्या काफी ज्यादा हो गई है, लेकिन अधिकतर इंसानो को साइनस होने के कारण के बारे में जानकारी नहीं होती है, चलिए अब हम आपको साइनस होने के कारणों के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है –

  • साइनस की परेशानी होने का सबसे आम कारण होता है जुकाम, जुकाम में इंसान की नाक लगातार बहती रहती है या नाक बंद हो जाती है जिसकी वजह से पीड़ित को सांस लेने में परेशानी होती है| ऐसे इंसान जिन्हे बार बार या लगातार जुकाम की समस्या होती है उनमे साइनस की परेशानी होने की प्रबल सम्भावना होती है|
  • साइनस होने का कारण प्रदूषण भी होता है, आजकल प्रदूषण कितना बाद गया है यह हमे बताने की जरुरत नहीं है, ऐसे इंसान जो ज्यादा प्रदूषण वाले इलाकों में रहते है या प्रदूषित वातावरण के सम्पर्क में ज्यादा रहते है उन्हें साइनस की परेशानी जल्दी हो सकती हैं। प्रदूषित वातावरण में मौजूद हानिकारक तत्व, धूल के कण और दूषित वायु हमारी श्वास नली पर बहुत ज्यादा बुरा असर डालते हैं, जिनकी वजह से इंसान को जुकाम और दर्द इत्यादि की परेशानी हो सकती है जो आगे चलकर साइनस की परेशानी भी हो सकती है|
  • कुछ लोग नाक से सम्बंधित एलर्जी से पीड़ित होते है, ऐसे इंसान को बाहर की दूषित वायु, धूल के कण या मौसमी बदलाव की वजह से एलर्जी की परेशानी हो जाती है| अलेर्जी से पीड़ित इंसान की आवाज में बदलाव, सिर दर्द और जुकाम इत्यादि परेशानियो का सामना करना पड़ सकता है| साइनस होने का कारण नाक से सम्बंधित एलर्जी भी होती है, इसीलिए नाक की एलर्जी को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए|
  • साइनस होने का कारण नाक की हड्डी बढ़ना या नाक की हड्डी टेढ़ी होना भी होता है| किसी भी इंसान के बचपन या जवानी में नाक पर चोट लगने की वजह से या नाक पर दबाव पड़ने की वजह से नाक की हड्डी एक तरफ मुड़ जाती है तो हड्डी मुड़ने या टेढ़ी होने की वजह से नाक के छिद्र सही तरीके से काम नहीं करते है, श्वास छिद्रो में अवरोध होने की वजह से भी साइनस की परेशानी हो सकती है|
  • आज के समय में काफी सारे इंसान अस्थमा की परेशानी से पीड़ित है, यह तो हम सभी जानते ही है की अस्थमा साँस से संबंधित परेशानी होती है| अस्थमा से पीड़ित इंसान को साँस लेने में भी परेशानी होती है जिसका निवारण करने के लिए डॉक्टर पंप या स्पेसर देता है, जिसे लेने से साँस आसानी से ली जा सकती है| अस्थमा से पीड़ित इंसान की श्वास नालियां और फेफड़े काफी ज्यादा प्रभावित होते है जिसकी वजह से साइनस की परेशानी होने की सम्भावना काफी ज्यादा बड़ जाती है|
  • साइनस होने का कारण पोषक तत्वों रहित और असंतुलित भोजन करना भी होता है| यह तो हम सभी जानते है की भोजन में अगर पौष्टिक तत्वों की कमी होती है तो इसका नकारत्मक या दुष्प्रभाव हमारे शरीर और पाचन तंत्र पर पड़ता है| अगर कोई इंसान नियमित रूप से असंतुलित भोजन करता है तो शरीर में काफी सारी परेशानियां उत्पन्न हो जाती है जिनमे से एक साइनस की परेशानी भी होती है|

साइनस होने के लक्षण (Symptoms of Sinus in hindi)

ऊपर आपने साइनस कया है और साइनस होने के करने के बारे में जानकारी प्राप्त की, अब हम आपको साइनस के लक्षण के बारे में बताने जा रहे है हालाँकि साइनस के कुछ लक्षण आम होते है, लेकिन अगर आपको निम्न लक्षण दिखाई दें तो लापरवाही ना करें तुरंत जांच कराएं| चलिए अब हम आपको साइनस के लक्षण (Symptoms of Sinus in hindi) के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है –

  • सिरदर्द को साइनस का सबसे सामान्य लक्षण (Symptoms of Sinus in hindi) माना जाता है, जब कोई भी इंसान साइनस की परेशानी से पीड़ित होता है तो वायु विवर या साइनस कैविटीज बंद हो जाती है या उस पर सूजन आ जाती है जिसकी वजह से पीड़ित को साँस लेने में परेशानी होती है| इंसान को सांस लेने के लिए काफी ज्यादा जोर लगाना पड़ता है, अधिक जोर लगाने की वजह से सर की नसों में अधिक दबाव पड़ता है जिसकी वजह से भारी सिरदर्द उत्पन्न होता है| इसीलिए अगर आपको लगातार सिर दर्द की समस्या हो रही है और कई बार सिर दर्द बहुत ज्यादा तीव्र और असहनीय हो रहा है तो आपको साइनस की परेशानी हो सकती है इसलिए सिर दर्द को हल्के में ना लें, तुरंत जांच कराएं क्योंकि सिर दर्द साइनस के लक्षण (Symptoms of Sinus in hindi) में शामिल होता है|
  • साइनस के लक्षण (Symptoms of Sinus in hindi) बुखार और बेचैनी भी होती है, अगर आपको बुखार आ रहा है और बुखार के साथ साथ बेचैनी या घबराहट भी हो रही है तो आप साइनस की समस्या से पीड़ित हो सकते है| हालाँकि यह जरुरी नहीं है की बुखार और बेचैनी हो रही है तो आपको साइनस की परेशानी हो हो सकता है वायरल फीवर इत्यादि हो| ऐसे डॉक्टर से परामर्श लें और जांच करा लें जिससे आपको सही से पता चल सके|
  • अगर किसी भी इंसान की नाक से बलगम जैसा तरल पदार्थ थोड़े थोड़े समय में या लगातार बह रहा हो और इसकी वजह से आपकी आवाज में भारीपन या धीमापन आ गया है तो आपको सचेत हो जाना चाहिए क्योंकि आप साइनस की परेशानी से पीड़ित हो सकते है| ऐसे में आपको लापरवाही नहीं करनी चाहिए तुरंत चिकित्सक से मिले और परामर्श के बाद इलाज कराएं| नाक से तरल पदार्थ आना या आवाज में बदलाव साइनस के लक्षण (Symptoms of Sinus in hindi) में शामिल होता है
  • साइनस का लक्षण (Symptoms of Sinus in hindi) आँखों के ऊपर दर्द भी होता है, साइनस कैविटीज़ में सूजन या रूकावट होने की वजह से आंखों के ऊपर दर्द की परेशानी हो सकती है, अगर आपकी आँखों के ऊपर दर्द की परेशानी हो रही है तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें|
  • यह तो हम सभी जानते ही है की किसी भी चीज की खुशबु या बदबू की जानकारी नाक के द्वारा ही मिलती है, साइनस का लक्षण (Symptoms of Sinus in hindi) सूंघने की शक्ति कमजोर होना भी होता है| साइनस की परेशानी में झिल्ली में सूजन या अवरोध आ जाने की वजह से इंसान की सूंघने की शक्ति कमजोर हो जाती है| इसीलिए अगर आपको किसी भी चीज को सूंघने से उसकी खुशबु या बदबू के बारे में जानकारी नहीं हो रही है तो आप साइनस की समस्या से पीड़ित हो सकते है, ऐसे में आपको जांच करनी जरुरी है|
  • साइनस का लक्षण दांतों में दर्द भी होता है, दांतो में दर्द होने का कारण साइनस कैविटीज़ में बनने वाला तरल पदार्थ की वजह से दांतो पर दबाव पड़ता है जिसकी वजह से दांतो में दर्द की समस्या हो सकती है, इसीलिए अगर आपको दांतो में दर्द की समस्या है तो तुरंत दांतो के डॉक्टर के पास जाकर चेक अप करा लें|
  • कुछ इंसानो का मानना है की अगर किसी भी इंसान को तेज जुकाम के साथ सिरदर्द की समस्या हो रही है या नींद ना आ रही हो या नाक बार-बार बंद हो जाती हो और इनके साथ साथ थकान भी महसूस हो रही है तो आप साइनस की समस्या (Symptoms of Sinus in hindi) से पीड़ित हो सकते है|
  • साइनस के लक्षण (Symptoms of Sinus in hindi) में शामिल तेज खांसी भी होती है, अगर कोई इंसान साइनस की समस्या से पीड़ित होता है तो इस परेशानी में इंसान का गला और फेफड़े काफी ज्यादा प्रभावित होते हैं| गले और फेफड़े में परेशानी होने की वजह से इंसान को तेज खांसी आने की समस्या हो सकती है, इसीलिए तेज खांसी या खांसी की समस्या लगातार बनी हुई है तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें|

Home remedies for Sinus in hindi

साइनस का परमानेंट इलाज | साइनस के घरेलू उपाय (Home remedies for Sinus in hindi)

साइनस का परमानेंट इलाज करने के लिए इंसान घरेलू नुस्खों को अपनाना सबसे ज्यादा पसंद करते है, चलिए अब हम आपको साइनस के घरेलू उपाय बताने जा रहे है जिन्हे अपनाकर आप आसानी से साइनस की समस्या से निजात पा सकते है, लेकिन अगर आप नीचे बताए जा रहे है साइनस के घरेलू उपाय या साइनस के लिए आयुर्वेदिक दवा (Sinus ke lie Ayurvedic dawa) का उपयोग किसी वैध या चिकित्सक की सलाह से करेंगे तो आपको बहुत जल्द और पूर्ण लाभ प्राप्त होता है| साइनस का परमानेंट इलाज करने के घरेलू उपाय (Home remedies for Sinus in hindi) निम्न प्रकार है –

साइनस का रामबाण इलाज है अदरक (Ginger : Home remedies for Sinus in hindi)

शायद ही कोई घर हो जिस्मे सर्दियों में अदरक का इस्तेमाल ना किया जाता हो हालाँकि सर्दियों के मुकाबले गर्मियों में अदरक का इस्तेमाल कम लोग करते है क्योंकि अदरक की तासीर गर्म होती है| अदरक में जिन्जिरोल नामक एक एक्टिव कंपाउंड मौजूद होता है जो साइनस जैसी परेशानियो को दूर करने में सहायक होता है इसके आलावा अदरक में मौजूद औषधीय गुण, एंटी-ऑक्सीडेंट गुण और कई तरह के विटामिन और मिनरल होते है जो शरीर की इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत करने के साथ साथ साइनस की समस्या उत्पन्न करने वाले बैक्टीरियल संक्रमण को भी कम करने में मददगार होते है|

अगर आप साइनस की समस्या से पीड़ित है और आप साइनस का परमानेंट इलाज या साइनस के लिए आयुर्वेदिक दवा (Sinus ke lie Ayurvedic dawa) सर्च कर रहे है तो अदरक आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है| साइनस की घरेलू दवा बनाने के लिए सबसे पहले दो से तीन कप पानी लेकर उसे गर्म होने के लिए रख दें फिर उसमे थोड़ा सा अदरक अच्छी तरह से कूटकर डाल दें| पानी को लगभग 10 मिनट तक उबलने के बाद गैस को बंद कर दें फिर जब पानी ठंडा हो जाएं तो उसे किसी कप में छान कर पी लें| नियमित रूप से इस साइनस के घरेलू इलाज को करने से जल्द राहत प्राप्त होती है|

साइनस का घरेलू इलाज है लहसुन और प्याज (Garlic and Onion : Home remedies for Sinus in hindi)

प्याज और लहसुन का इस्तेमाल सभी घरो में किया जाता है, प्याज और लहसुन सब्जी का स्वाद बढ़ाने के साथ साथ हमारे शरीर के लिए भी काफी ज्यादा लाभदायक होते है| लेकिन कया आप जानते है की प्याज और लहसुन को साइनस का परमानेंट इलाज या साइनस के लिए आयुर्वेदिक दवा के रूप में भी जाना जाता है, प्राचीन समय में साइनस का इलाज करने के लिए प्याज और लहसुन का सेवन करने की सलाह दी जाती थी| प्याज और लहसुन का सेवन करने से शरीर में बनने वाले बलगम को खत्म करने और बलगम को शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है|

प्याज और लहसुन में मौजूद औषधीय गुण सर्दी, खांसी और साइनस के संक्रमण को कम करने में मददगार साबित होते है| साइनस की घरेलू दवा (Sinus ke lie Ayurvedic dawa) बनाने के लिए सबसे पहले एक गिलास पानी को उबलने के लिए रख दें फिर इस पानी में थोड़ी सी प्याज और लहसून को छोटे छोटे टुकड़ो में काट कर डाल दें, जब पानी में उबाल आ जाएं तो गैस कम कर दें और पानी में से निकलने वाली भाप में अपना मुंह रखकर इस भाप को अंदर लें या सिकाई करें| नियमित रूप से साइनस के घरेलू इलाज को करने से बहुत जल्द साइनस के दर्द से छुटकारा मिलने के साथ साथ साइनस की परेशानी से भी आराम प्राप्त होता है|

साइनस की देसी दवा है पानी (Water : Home remedies for Sinus in hindi)

जल ही जीवन है यह लाइन हम सभी जानते है, किसी भी इंसान को स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त मात्रा में जल पीना बहुत जरुरी है| जब किसी भी इंसान के शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो शरीर कमजोर होने के साथ साथ शरीर में कई सारी बिमारी होने की संभावना बढ़ जाती है| पानी की वजह से ही हमारे शरीर से शरीर के विषैले और हानिकारक तत्व पेशाब के माध्यम से बाहर निकल जाते है, अगर आप साइनस की समस्या (Sinus ke lie Ayurvedic dawa) से बचना चाहते है तो नियमित रूप से तीन से चार लीटर पानी जरूर पिएँ|

साइनस का रामबाण इलाज है हल्दी (Turmeric : Home remedies for Sinus in hindi)

हल्दी को सौ बीमारियो की एक दवा के रूप में जाना जाता है, हल्दी औषधीय गुणों से भरपूर होती है| अगर आप साइनस की समस्या से पीड़ित है और आप साइनस का परमानेंट इलाज या साइनस के लिए आयुर्वेदिक दवा (Sinus ke lie Ayurvedic dawa) ढूंढ रहे है तो हल्दी आपके लिए फायदेमंद हो सकती है| हल्दी में मौजूद औषधीय गुण और पोषक तत्व साइनस में होने वाले दर्द और साइनस की समस्या को करने में मददगार होते है| नियमित रूप से एक गिलास हल्के गुनगुने दूध में एक छोटा चम्मच हल्दी और एक छोटा चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिलाकर पी लें, साइनस की रामबाण दवा का सेवन नियमित रूप से करने से जल्द राहत मिलती है।

साइनस के लिए आयुर्वेदिक दवा है काली मिर्च (Black Pepper : Home remedies for Sinus in hindi)

काली मिर्च का इस्तेमाल लगभग सभी घरो में मसाले के रूप में किया जाता है, लेकिन कया आप जानते है की काली मिर्च साइनस की सूजन को कम करने के साथ साथ साइनस की परेशानी को भी कम करने में सहायक होती है| काली मिर्च में मौजूद औषधीय गुण और सूजनरोधी गुण साइनस की सुजान को कम करने के साथ साथ बलगम सुखाने में सहायक होते है, नियमित रूप से काली मिर्च का सेवन उचित मात्रा में करने से जल्द आराम मिलता है| काली मिर्च का सेवन आप खाने में, चाय में, सूप में इत्यादि में डालकर कर सकते है, कुछ लोग काली मिर्च को साइनस का परमानेंट इलाज या साइनस के लिए आयुर्वेदिक दवा (Sinus ke lie Ayurvedic dawa) भी कहते है|

साइनस का परमानेंट इलाज है टी ट्री ऑयल (Tea Tree Oil : Home remedies for Sinus in hindi)

अगर आप साइनस की परेशानी से पीड़ित है और आप साइनस का परमानेंट इलाज या साइनस के लिए आयुर्वेदिक दवा (Sinus ke lie Ayurvedic dawa) सर्च कर रहे है तो आपके लिए टी ट्री ऑयल आपके लिए लाभदायक हो सकता है| टी ट्री ऑयल में मौजूद एंटीसेप्टिक, एंटी इंफ्लैमटोरी, एंटी माइक्रोबियल और औषधीय गुण साइनस का इलाज करने में मददगार साबित होते हैं| साइनस की दवा बनाने के लिए सबसे पहले किसी बर्तन में पानी गर्म कर लें, फिर इस पानी में टी ट्री ऑयल की तीन से पाँच बूंद को डाल दें, फिर इस पानी से निकलने वाली भाप को लें लें, दिन में में दो से तीन बार इस तरह भाप लेने से जल्द साइनस और साइनस के दर्द से आराम प्राप्त होता है|

साइनस का घरेलू उपचार है दालचीनी (Benefit of Cinnamon in Sinusitis in Hindi)

दालचीनी को मसाले के रूप में जाना जाता है, दालचीनी आपको लगभग सभी घरो में आसानी से मिल जाती है| दालचीनी में मौजूद औषधीय गुण और पोषक तत्व साइनस पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों को समाप्त करने में सहायक होते है| सबसे पहले एक गिलास हल्का गर्म पानी लेकर उसमे लगभग एक छोटा चम्मच दालचीनी पाउडर डाल कर अच्छी तरह से मिलाकर पी लें, नियमित रूप से दिन में एक बार इस नुस्खे को करने से जल्द साइनस की समस्या में आराम मिलता है। दालचीनी को आप साइनस का परमानेंट इलाज या साइनस के लिए आयुर्वेदिक दवा (Sinus ke lie Ayurvedic dawa) भी कह सकते है|

साइनस के दर्द से आराम दिलाने में सहायक है नींबू (Lemon : Home remedies for Sinus in hindi)

नींबू में मौजूद औषधीय गुण (Sinus ke lie Ayurvedic dawa) और पोषक तत्व साइनस में होने वाले दर्द से छुटकारा दिलाने में सहायक होते है| नींबू हमारे शरीर के लिए लाभकारी होता है, साइनस का इलाज करने के लिए सबसे पहले एक गिलास पानी लेकर उसमे एक नींबू का रस और एक चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिला कर पी लें, नियमित रूप से इस उपाए को करने से कुछ दिनों में ही आराम मिलता है|

साइनस का घरेलू उपाए है मेथी दाना (Fenugreek : Home remedies for Sinus in hindi)

मेथी दाना से भी आप साइनस का घरेलू उपचार कर सकते है, मेथी दाना में मौजूद औषधीय गुण और पोषक तत्व साइनस की परेशानी से आराम दिलाने में मददगार साबित होते है| सबसे पहले एक गिलास पानी को गर्म होने के लिए रख दें जब पानी उबलने लगे तब उस पानी में दो से तीन चम्मच मेथी के दानें डाल कर हल्की आंच पर पानी को पकने दें लगभग 10 मिनट बाद गैस को बंद कर दें| हल्का गर्म रहने पर मिश्रण को छान लें और इस पानी को दिन में दो से तीन बार में पी लें| नियमित रूप से इस उपाय को करने से जल्द साइनस की परेशानी में आराम मिलता है, आप चाहे तो मेथी दाना को साइनस का परमानेंट इलाज या साइनस के लिए आयुर्वेदिक दवा (Sinus ke lie Ayurvedic dawa) भी कह सकते है|

साइनस में कया खाना चाहिए | साइनस की परेशानी में किन चीजों का सेवन करना चाहिए

साइनस की परेशानी से पीड़ित इंसान को साइनस का परमानेंट इलाज या साइनस के लिए आयुर्वेदिक दवा का सेवन करना चाहिए लेकिन अगर आप अपने खाने पीने का ख्याल नहीं रखते है तो आपकी बीमारी जल्दी सही नहीं होती है और हो सकता है की बीमारी बढ़ जाएं| चलिए अब हम आपको साइनस में कया खाना चाहिए इसके बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है –

  • ताज़ी सब्जियों का सेवन करें और ताज़ी सब्जियों का ही सूप पिएँ, सब्जियों में आप लौकी, कद्दू, तुरई इत्यादि का सेवन करें|
  • साइनस की परेशानी में खजूर, किशमिश, सोंठ, अजवायन, हींग और लहसुन का सेवन करना चाहिए|
  • नियमित रूप से सुबह खाने से पहले या खाने के बाद एक आंवला जरूर खाएं, आंवले में मौजूद औषधीय गुण साइनस की परेशानी को कम करने में सहायक होते है|
  • खाना बनाने में जैतून के तेल का इस्तेमाल करें|
  • नियमित रूप से सेब का सेवन करें|
  • खाने में साबुत अनाज, फलियाँ, दालें और सूप इत्यादि का सेवन फायदेमंद होता है|
  • पानी प्रचुर मात्रा में पीना चाहिए, लेकिन ख्याल रखें की पानी अच्छी तरह साफ हो या फिल्टर पानी ही पीना चाहिए|

साइनस में परहेज | साइनस में कया नहीं खाना चाहिए

ऊपर आपने जाना की साइनस में कया खाना चाहिए अब हम आपको साइनस में परहेज के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है| किसी भी बिमारी में अगर मरीज परहेज नहीं करता है तो परेशानी बढ़ने की प्रबल सम्भावना होती है, चलिए अब हम आपको साइनस में परहेज या साइनस में किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए, इसके बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है

  • चॉकलेट्स या चॉक्लेट्स से निर्मित चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए|
  • मैदे से बानी हुई चीजों का सेवन करने से परहेज करना जरुरी है|
  • तला हुआ भोजन या प्रोसेस्ड फूड या जंक फूड या फास्ट फूड का सेवन करने से बचना चाहिए|
  • कैफ़ीन युक्त पकडारथो का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए|
  • दही, छाछ या ठंडी तासीर वाली चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए|
  • खाने में चावल का सेवन करने से बचें|
  • अधिक मिर्च मसाले वाला भोजन या तीखा खाना खाने से परहेज करना चाहिए|
  • केले का सेवन भी नुक्सान दे सकता है इसलिए केला बिलकुल ना खाएं|
  • गन्ने का रस भी नहीं पीना चाहिए|

निष्कर्ष – हम आशा करते है की आपको हमारे लेख साइनस का परमानेंट इलाज (Home remedies for Sinus in hindi) या साइनस के लिए आयुर्वेदिक दवा (Sinus ke lie Ayurvedic dawa) में दी गई जानकारी पसंद आई होगी लेकिन किसी कारणवश अगर आप हमारे द्वारा दी गई जानकारी से संतुष्ट नहीं है तो आप गूगल या बिंग पर साइनस का परमानेंट इलाज (Home remedies for Sinus in hindi) या साइनस के लिए आयुर्वेदिक दवा (Sinus ke lie Ayurvedic dawa) लिखकर सर्च कर सकते है|

error: Content is protected by DCMA !!
टाइफाइड के लक्षण (typhoid symptoms in hindi) jaldi mote hone ki 5 best homeopathic dawa